Mahamrityunjaya Mantra The Maha mantra of Lord Shiva

What is Mahamrityunjaya Mantra

Om Triyambakam Yajamahe Sugandhim Pusthi Vardhanam
Urvarukamiva Bandhanan Mrityor Mukshiya Mamratat Om ||

Mahamrityunjaya MantraMahamrityunjaya Mantra is a holy mantra which is created by Lord Shiva. You have to take a deep breath before reciting the mahamrityunjaya mantra and chant to the end of your breath. Do not chant mantra with speed or very fast, that will have no meaning. One time recite the mantra loudly and long till it to the end of your breath. The vibration will slowly effect have effect on thousand time you recite the mantra. There is no meaning of fast chanting, it will be waste of your time, and you will get frustrate on having no result beacuse of improper chanting. Mahamrityunjaya mantra can be chanted by male or female of any age. There is no restriction for any one. As lord shiva is a creator of all living beings and the whole universe and provide plant , flesh , meat or many thing to eat. so there is no restriction of chanting mahamrityunjaya manta by vegetarian or non vegetarian people, to chant this holy pure mantra. So be relax and chant this mantra. But you must have to believe on this mantra to deep of the heart. When you chant this mantra you have to feel and imagine the lord Shiva in your mind and you have to flow down youself in them and feel free in yourself. Don’t make yourself stressfull or feel any kind of problem. Stay calm and feel the beauty of nature that they had given in surrounding of you. Feel all the power around yourself and make yourself to absorb in you that power. Every time you chant the mahamrityunjaya mantra, Om word should be prounanced with long breath.

The mahamrityunjaya mantra is a prayer or a worship and faith towards lord shiva also denoted as mahamrityunjaya mantra , a well known or can say a universal and the most powerfull mantra . the founder of mahamrityunjaya mantra was shiva , the hindu’s lord also known as rudra mantra. in many parts it is known by ” conquering mantra of Great death” ” free from sudden or certain death”, also known as the Tryambakam mantra is orignated in Rigveda . litrally the tryambakam mantra means open of three eyes by lord shiv when he was in epithet of Rudra avtar . its also defined in new version in yajurveda.
it is the most powerfull mantra and Which is not a Toda in the whole universe .
it have several meanings of nothing is impossible for lord shiva

Mahamrityunjaya Mantra in IASAT language:

tryambakaṃ yajāmahe sugandhiṃ puṣṭivardhanam
urvārukamiva bandhanānmṛtyormukṣīya mā’mṛtāt

Things to remember when you are performing mahamrityunjaya mantra in you life style.

  • – first sit normally.
  • – backbone straight.
  • – fold your hands and close eyes.
  • – now first take 10 long breath and be calm and relax.
  • – now imagine lord shiva image in your mind and speek mahamrityunjaya mantra 108 times clearly and loudly.

Effects Experiences:

Mahamrityunjaya MantraMahamrityunjaya mantra is a energitic mantra and is very powerful when you speak in your daily life. It will change your life and your negative thoughts.
When you chant mahamrityunjaya mantra loudly. The vibrations from your vocal chord transfer to your each and every part of your body.
Your helix and spritual sole will wakeup and all your negative thoughts will vanish out. Whatever you want in you life conquring, happiness, money, love, birth everything in this universe.
All the things will change from negative to positive and all the things will comes true in your life. With dedicatation and consistancy the most thing is require is to feel, belive faith on mahamrityunjaya mantra and lord shiva.

 

Bhagvan shiv ke Ling ki kahani

शिव लिंग भगवान शिव के पवित्र प्रतीक है कि भगवान शिव के भक्तों द्वारा पवित्र माना जाता है। शब्द, संस्कृत में ‘Lingum’ का अर्थ है, ‘पेनिस’। शिव Lingum, इसलिए भगवान शिव के लिंग का अर्थ है और इसलिए सबसे Shaivaites विशेष रूप से हिन्दू स्त्राी (नारी) द्वारा पवित्र माना जाता है। शिव लिंग विशेष रूप से व्यभिचार के लिए शारीरिक इच्छाओं के लिए सदियों से हिन्दू धर्म में पूजा कर दिया गया है। शिव लिंग की पूजा पवित्र और बेहतर शिव माना जाता है Mahapurana कहते हैं शिव अपने लिंग ‘लिंग’ फेंक दिया गया है हिंदू महिलाओं को संतुष्ट करने के लिए है, लेकिन एक समलैंगिक व्यक्ति बैठने के लिए पर यह (मंदिर) शिव मंदिरों में आनंद ले सकता है इच्छा है। इसका कारण यह है प्रपत्र जबकि सच्चाई को बनाए रखने के भक्तों शिव लिंग देखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं अपने उपयोगकर्ताओं के विशाल आकार के कारण पूजा सरल बनाता है।

शिव लिंग की संरचना

शिव का सबसे प्रचलित आइकन और लगभग सभी शिव मंदिरों में पाया, शिव लिंग एक गोल, अंडाकार, एक-प्रतिष्ठित विशाल लिंग कि आम तौर पर एक परिपत्र आधार या peetham पर सेट किया जाता है की छवि है। कुछ विद्वानों के अनुसार Peetham पराशक्ति, व्यभिचार के प्रकट शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है।
शिव lingas आमतौर पर पत्थर कि खुदवाए जा सकते हैं या तो हो सकता है या स्वाभाविक रूप से मौजूदा के बने होते हैं – svayambhu, इस तरह के रूप में एक तेज-बह रही नदी के आकार का। शिव lingas भी धातु, कीमती रत्न, क्रिस्टल, लकड़ी, पृथ्वी या इस तरह बर्फ के रूप में अस्थायी सामग्री का बनाया जा सकता है। कुछ विद्वानों का कहना है कि अस्थायी शिव लिंग जैसे रेत, चावल, पकाया भोजन, नदी मिट्टी, गोबर, मक्खन, रूद्राक्ष के बीज, राख, चंदन, darbha घास, एक फूल माला या गुड़, लेकिन कारण यौन रूप में 12 विभिन्न सामग्रियों से बना जा सकता है हिंदू महिलाओं की इच्छाओं मांग केवल पत्थर और इस्पात है।

शिव लिंग के विभिन्न व्याख्या

शिव लिंग या प्रतीक और भगवान शिव के रूप के रूप में शिव लिंग के बारे में इसके अलावा, धार्मिक विद्वानों शिव लिंग के विभिन्न व्याख्याओं दे दिया है। यहाँ लोकप्रिय सिद्धांतों और शिव लिंग है और इसकी उत्पत्ति से संबंधित व्याख्याओं से कुछ का संक्षिप्त विवरण है:

शिश्न की पूजा (पुरुष प्रजनन अंग)

Mahamrityunjaya Mantraकुछ विद्वानों के अनुसार, प्रभाव में शिव लिंग की पूजा “Dildo” प्रजनन समारोह की पूजा का मतलब है। के लिए, वे कहते हैं कि संस्कृत शब्द ‘लिंग’ का अर्थ अन्य सामान्य और विशेष रूप शिश्न (पुरुष प्रजनन अंग) में लिंग है। वे मानते हैं कि शिवलिंग के आधार योनि जो योनि मतलब या महिला प्रजनन अंग से मेल खाती है। एक शिव लिंग में लिंग और योनि के पत्राचार इसलिए शयन की प्रक्रिया का प्रतिनिधित्व के रूप में व्याख्या की है। विद्वानों ने आगे कहा कि कलश (पानी के कंटेनर) है कि शिव लिंग पर निलंबित किया गया है, जिसमें से शिवलिंग के ऊपर पानी भरी भी संभोग करने के विचार के अनुरूप विचार करना है।
जल्दी सिंधु घाटी सभ्यता के लिए शिव लिंग की उत्पत्ति कनेक्ट, विद्वानों विचार करना है कि सिंधु घाटी की जनजातियों ऊर्जा, निर्माण और ज्ञान के बिंदु के रूप में एक शिव लिंग में शिवलिंग और योनि की एकजुटता के लिए ले लिया।

तंत्र में व्याख्या

तंत्र के अनुसार, शिवलिंग आध्यात्मिक रूप में शिव के लिंग का प्रतीक है। वे कहते हैं, शिवलिंग प्राण-बीज के भीतर जो पूरे ब्रह्मांड का सार निहित है शामिल हैं। शिवलिंग आधार (योनि) जो कुछ या विष्णु, ब्रह्मा महिला और नपुंसक लिंग के रूप में दूसरों के अनुसार के अनुसार पार्वती का प्रतिनिधित्व करता है से बाहर उठता है।

पुराणों में व्याख्या

पुराणों, विशेष रूप से वामन पुराण, शिव पुराण, लिंग पुराण, स्कंद पुराण, मत्स्य पुराण और विश्व सारा-Prakasha की जुदाई और पृथ्वी पर भगवान शिव के लिंग की स्थापना के लिए अग्रणी संतों के अभिशाप के लिए शिव लिंग की उत्पत्ति का श्रेय । कुछ भी शिवलिंग की endlessness भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के अहं से जोड़ा जा करने के लिए देखें। अन्य विद्वानों का इस बात पर देखने अलग Parwathi ढीला चरित्र शिव के कारण के रूप में अपने लिंग काट रहा है और इसे फेंक दिया के रूप में वह एक हाथी जो परिणाम भगवान गणेश देखा जा सकता है अब दिन Gatars और नाला में फेंक दिया जा रहा है साथ यौन संबंध रखने वाले Parwathi देखा गया है।

Mahamrityunjaya mantra discription:

Before librating mahamrityunjaya mantra you have to know and understand deeply in this mantra and make faith towards mahamrityunjaya mantra and lord shiva.

what is,
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्

ॐ (aum)

– is a sanskrit sacred/mystical syllable in Sanatan Dharma or Hindu religions.

त्र्यम्बकं (tryambakam)

– the three eyed one ie. lord shiva,

त्रि + अम्बकम् (tri + ambakam)

– third eye of lord shiva

यजामहे (yajāmahe)

– We heartdly worship, adore, honour, revere, you

सुगन्धिम् (sugandhim)

– with sweet fragrance of flower,

पुष्टि (puṣṭi)

– for a well-nourished condition, thriving and prosperous fullness of life,

वर्धनम् (vardhanam)

– that causes to increase (in the health, wealth and well-being),

पुष्टि-वर्धनम् (puṣṭi vardhanam)

– pary to lord shiva to nourishes us and give us life fullness.

उर्वारुकमिव (urvārukam-iva)

– fruitful, filled like watery fruits. Also depicted as Powerful, large, huge… etc.

बन्धनान् (bandhanān)

– from the captivity i.e. from the stem of the cucumber/melon. Also, depicted as librate from fear of death using with mṛtyormukṣīya

मृत्योर्मुक्षीय (mṛtyormukṣīya)

– free from the fear of death.

मृत्यु: मुक्षीय (mṛtyoḥ + mukṣīya)

– freedom from fear of death.

मा अमृतात् (mā + amṛtāt)

– no immortality (free from fear of sudden death).

 

महामृत्युंजय-मंत्र के उपयोगी विषय

महामृत्युंजय के प्रयोग निम्न कानों में अधिक उपयोगी हैं-

  • 1. जन्मकूण्डलीं, लग्नकुडलीं, योचरकुंडली, दशा, महादशा, अन्तर्दशा, रथूलदशा. सूक्ष्मदशा में होने वाले सूर्यादि नवग्रहों द्वारा शरीर पीडा हो ।
  • 2. इष्ट-य-मित्रों से बियोग की संभावना हो या हो गया हो भाई-बन्धु से विद्रोह हो । दोषारोपण या कलंकित हो, चित्त उद्विग्न हो, द्रव्य नष्ट होता हो, रोग जैजीज्ञात्न से पिण्ड न छोड़ता हो ।
  • 3. विवाह-मेल आदि में दोष हों, षडाष्टक दोष हों ।
  • 4. राजभय, चौरभय हों ।
  • 5. मन धर्म से विचलित हो अशांति हो ।
  • 6. त्रिदोष, दुर्निवार्य रोग, ज्वरपीड़ग़, दुस्वप्न होते हो, आदि कारणरैं में मज्ञामृत्युज्जय जप करे या ब्राह्मण से करावें । कद्रर्यानुराध्दर मैं जपसंख्यादृ जि-सी प्रकार से महामारी जैसे-य-हैजा, प्लेग, शीतलता या अन्य प्रकार के महा उपद्रवों की शांति के लिये महामृत्युज्जय का मैं (एक) करोड़ जप कराना चाहिये । यदि रपामान्थ रोग हो, दुस्वप्न (माते हो पुत्र प्राप्ति के लिये-जती या पति प्राप्ति के लिये , ऐश्वर्य)|
  • 7. महामारी आदि का प्रकोप हो ।

कब्बर्यानुसार दो जप किसी प्रकार से महामारी जैसे”., प्लेग, शीतला या अन्य प्रकार के महा उपद्रवों की शांति के लिये महामृत्युज्जय का १ (एक) करोड़ जप कराना चाहिये ।
यदि सामान्य रोग हो, दुस्वप्न आते हो पुत्र प्राप्ति के लिये-खे या पति प्राप्ति के लिये, ऐश्वर्य के लिये

इस मंत्र के जप में ध्यान परमावश्यक है। शिवपुराण में यह ध्यान इस प्रकार बतलाया गया है: हस्ताम्भोजयुगस्थकुम्भयुगलादुदधृत्य तोयं शिरः सिंचन्तं करयोग्रुगेन दधतं स्वांके सकुम्भौ करों। अक्षस्रमृगहस्तम्बुजगतं मूर्धस्थञ्चन्द्रस्रवत्। पीयूषार्द्रतनु भजे सगिरिज व्यक्ष च मृत्युंजयम। (सतीख. 38.24) ‘भगवान मृत्युंजय के आठ हाथ हैं। वे अपने ऊपर के दोनों करकमलों से दो घड़ों को उठाकर उसके नीचे के दो हाथों से जल को अपने सिर पर उड़ेल रहे हैं। सबसे नीचे के दो हाथों में भी घड़े लेकर उन्हें अपनी गोठ में रख लिया है। शेष दो हाथों में वे रूद्राक्ष को माला तथा मृगी-मुद्रा धारण किये हुए हैं। वे कमल के आसन पर बैठे हैं और उनके शिरःस्थ चन्द्र से निरन्तर अमृतवृष्टि के कारण उनका शरीर भीगा हुआ है। उनके तीन नेत्र हैं तथा अन्य मृत्यु को सर्वथा जीत लिया है। उनके वामांगभाग में गिरिराजनन्टिनी भगवती उमा विराजमान हैं।’ इस प्रकार ध्यान करके रूद्राक्षमाला से इस महामृत्युंजय मंत्र का सवा लाख जप करना
चाहिए। इस मंत्र का 11 लाख जप तथा एक लाख दस हजार दशांश जप करने से सब प्रकार के रोगों का नाश होता है। इतना न हो तो कम-से-कम सवा लाख जप और साढ़े बारह हजार दशांश जप अवश्य करना चाहिए।

महामृत्युंजय-मंत्र की महिमा और जपविधिः

भगवान मृत्युंजय के जप ध्यान से मार्कण्डेयजी, राजा श्धेत आदि के कालभयनिवारण की कथा शिवपुराण, स्कन्दपुराण-काशीखण्ड, पद्मपुराण-उत्तरखण्ड-माघमाहात्म्य आदि में आती है। आयुर्वेद के ग्रन्थों में भी मृत्युंजय-योग मिलते हैं। मृत्यु को जीत लेने के कारण ही इन मंत्रयोगों को मृत्युंजय’ कहा जाता है।
साधक को चाहिए कि किसी पवित्र स्थान में स्नान, आचमन, प्राणायाम, गणेशस्मरण, पूजन-वन्दन के बाद तिथि वारादि का उच्चारण करते हुए संकल्प, करन्यास, हृदयदिन्नयास, ध्यानादि करके मंत्रजप का प्रारमअ करे।

Mahamrityunjaya mantra meaning

As on the above topics you an read about the meaning of the mahamrityunjaya mantra.

Mahamrityunjaya mantra benefits

In Shastras and Puranas to get rid of incurable diseases and to avoid premature death, chanting of Mahamrityunjaya mantra is special mentioned. Mahamrityunjaya mantra is to please Lord Shiva. Due to its effects man survives from un-natural death, also attains life’s amazing grace with the blessings of Shiva Mahakala. Illness, accident, off the unwelcome effects of the planets, avoiding death and to raise the age, you should chant the Mahamrityunjaya mantra for 125M times.

Mahamrityunjaya mantra anuradha paudwal

Anuradha Paudwal is a famous indian singer. She Sing Mahamrityinjaya Mantra in her sweet voice Below is the video from youtube where she sings the mahamrityunjaya mantra. Listen and feel the please of the mantra.

Mahamrityunjaya mantra 108 times

If you want to take benifits of mahamrityunjaya mantra then you have to make a habit to chant it for 108 times a day. Your life will become full of grace and happiness. You will never suffer from any diseases in life and you will live a fruitful life with the blessings of Lord Shiva.

Mahamrityunjaya mantra in hindi

Here in this article we have explained the benifits of Mahamrityunjaya mantra in hindi and english as well. You can refer to any page of our site to get more about the Mahamrityunjaya mantra.

Mahamrityunjaya mantra by suresh wadkar

You can also listen the Mahamrityunjaya mantra in the voice of famous singer Suresh Vadkar. Who had reited it for 108 times and can get beinfits from hi melodius voice.

Mahamrityunjaya mantra ringtone

Ringtones are also available on various sites for mobile. Which you can set as ringtone of your mobile and every time the phone gets ringed you will remember the Lord Shiva.

Other Refrences:

Origin of Shiva Mantra
Rigveda
Rishi Markandeya

“Fear not what is not real, never was and never will be.
What is real, always was and cannot be destroyed.”

Bhagavad Gita

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Mahamrityunjaya Mantra in Hindi

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